Wednesday, 24 July, 2024

Laxman meet Sumitra

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लक्ष्मण माता सुमित्रा को मिलते है
 
गुरतिय पद बंदे दुहु भाई । सहित बिप्रतिय जे सँग आई ॥
गंग गौरि सम सब सनमानीं । देहिं असीस मुदित मृदु बानी ॥१॥
 
गहि पद लगे सुमित्रा अंका । जनु भेटीं संपति अति रंका ॥
पुनि जननि चरननि दोउ भ्राता । परे पेम ब्याकुल सब गाता ॥२॥
 
अति अनुराग अंब उर लाए । नयन सनेह सलिल अन्हवाए ॥
तेहि अवसर कर हरष बिषादू । किमि कबि कहै मूक जिमि स्वादू ॥३॥
 
मिलि जननहि सानुज रघुराऊ । गुर सन कहेउ कि धारिअ पाऊ ॥
पुरजन पाइ मुनीस नियोगू । जल थल तकि तकि उतरेउ लोगू ॥४॥
 
(दोहा) 
महिसुर मंत्री मातु गुर गने लोग लिए साथ ।
पावन आश्रम गवनु किय भरत लखन रघुनाथ ॥ २४५ ॥

 

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