Tuesday, 16 July, 2024

Sumantra take trio in chariot

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Sumantra take trio in chariot

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सुमंत्र ने राम, सीता लक्ष्मण को रथ में बिठाया    
 
तब सुमंत्र नृप बचन सुनाए । करि बिनती रथ रामु चढ़ाए ॥
चढ़ि रथ सीय सहित दोउ भाई । चले हृदयँ अवधहि सिरु नाई ॥१॥
 
चलत रामु लखि अवध अनाथा । बिकल लोग सब लागे साथा ॥
कृपासिंधु बहुबिधि समुझावहिं । फिरहिं प्रेम बस पुनि फिरि आवहिं ॥२॥
 
लागति अवध भयावनि भारी । मानहुँ कालराति अँधिआरी ॥
घोर जंतु सम पुर नर नारी । डरपहिं एकहि एक निहारी ॥३॥
 
घर मसान परिजन जनु भूता । सुत हित मीत मनहुँ जमदूता ॥
बागन्ह बिटप बेलि कुम्हिलाहीं । सरित सरोवर देखि न जाहीं ॥४॥
 
(दोहा)   
हय गय कोटिन्ह केलिमृग पुरपसु चातक मोर ।
पिक रथांग सुक सारिका सारस हंस चकोर ॥ ८३ ॥

 

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