Sunday, 3 March, 2024

Bal Kand Doha 119

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Bal Kand  							Doha 119

Bal Kand Doha 119

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श्रीराम की महिमा
 
(चौपाई)
कासीं मरत जंतु अवलोकी । जासु नाम बल करउँ बिसोकी ॥
सोइ प्रभु मोर चराचर स्वामी । रघुबर सब उर अंतरजामी ॥१॥
 
बिबसहुँ जासु नाम नर कहहीं । जनम अनेक रचित अघ दहहीं ॥
सादर सुमिरन जे नर करहीं । भव बारिधि गोपद इव तरहीं ॥२॥
 
राम सो परमातमा भवानी । तहँ भ्रम अति अबिहित तव बानी ॥
अस संसय आनत उर माहीं । ग्यान बिराग सकल गुन जाहीं ॥३॥
 
सुनि सिव के भ्रम भंजन बचना । मिटि गै सब कुतरक कै रचना ॥
भइ रघुपति पद प्रीति प्रतीती । दारुन असंभावना बीती ॥४॥
 
(दोहा)
 
पुनि पुनि प्रभु पद कमल गहि जोरि पंकरुह पानि ।
बोली गिरिजा बचन बर मनहुँ प्रेम रस सानि ॥ ११९ ॥

 

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