Thursday, 30 May, 2024

Bal Kand Doha 47

78 Views
Share :
Bal Kand  							Doha 47

Bal Kand Doha 47

78 Views

याज्ञवल्क्य और भरद्वाज का संवाद
 
(चौपाई)
जैसे मिटै मोर भ्रम भारी । कहहु सो कथा नाथ बिस्तारी ॥
जागबलिक बोले मुसुकाई । तुम्हहि बिदित रघुपति प्रभुताई ॥१॥
 
राममगत तुम्ह मन क्रम बानी । चतुराई तुम्हारी मैं जानी ॥
चाहहु सुनै राम गुन गूढ़ा । कीन्हिहु प्रस्न मनहुँ अति मूढ़ा ॥२॥
 
तात सुनहु सादर मनु लाई । कहउँ राम कै कथा सुहाई ॥
महामोहु महिषेसु बिसाला । रामकथा कालिका कराला ॥३॥
 
रामकथा ससि किरन समाना । संत चकोर करहिं जेहि पाना ॥
ऐसेइ संसय कीन्ह भवानी । महादेव तब कहा बखानी ॥४॥
 
(दोहा)
कहउँ सो मति अनुहारि अब उमा संभु संबाद ।
भयउ समय जेहि हेतु जेहि सुनु मुनि मिटिहि बिषाद ॥ ४७ ॥

 

Share :

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *