Friday, 14 June, 2024

Bharat embrace Guha

87 Views
Share :
Bharat embrace Guha

Bharat embrace Guha

87 Views

 भरत गुह को गले लगाता है
 
भेंटत भरतु ताहि अति प्रीती । लोग सिहाहिं प्रेम कै रीती ॥
धन्य धन्य धुनि मंगल मूला । सुर सराहि तेहि बरिसहिं फूला ॥१॥
 
लोक बेद सब भाँतिहिं नीचा । जासु छाँह छुइ लेइअ सींचा ॥
तेहि भरि अंक राम लघु भ्राता । मिलत पुलक परिपूरित गाता ॥२॥
 
राम राम कहि जे जमुहाहीं । तिन्हहि न पाप पुंज समुहाहीं ॥
यह तौ राम लाइ उर लीन्हा । कुल समेत जगु पावन कीन्हा ॥३॥
 
करमनास जलु सुरसरि परई । तेहि को कहहु सीस नहिं धरई ॥
उलटा नामु जपत जगु जाना । बालमीकि भए ब्रह्म समाना ॥४॥
 
(दोहा)   
स्वपच सबर खस जमन जड़ पावँर कोल किरात ।
रामु कहत पावन परम होत भुवन बिख्यात ॥ १९४ ॥

 

Share :

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *