Friday, 14 June, 2024

Dashratha shock by Kaikeyi’s demands

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Dashratha shock by Kaikeyi’s demands

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कैकेयी के वचन से दशरथ को आघात  
 
एहि बिधि राउ मनहिं मन झाँखा । देखि कुभाँति कुमति मन माखा ॥
भरतु कि राउर पूत न होहीं । आनेहु मोल बेसाहि कि मोही ॥१॥
 
जो सुनि सरु अस लाग तुम्हारें । काहे न बोलहु बचनु सँभारे ॥
देहु उतरु अनु करहु कि नाहीं । सत्यसंध तुम्ह रघुकुल माहीं ॥२॥
 
देन कहेहु अब जनि बरु देहू । तजहुँ सत्य जग अपजसु लेहू ॥
सत्य सराहि कहेहु बरु देना । जानेहु लेइहि मागि चबेना ॥३॥
 
सिबि दधीचि बलि जो कछु भाषा । तनु धनु तजेउ बचन पनु राखा ॥
अति कटु बचन कहति कैकेई । मानहुँ लोन जरे पर देई ॥४॥
 
(दोहा)   
धरम धुरंधर धीर धरि नयन उघारे रायँ ।
सिरु धुनि लीन्हि उसास असि मारेसि मोहि कुठायँ ॥ ३० ॥

 

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