Thursday, 30 May, 2024

Himalaya advise Uma for penance

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उमा को तप करने की हिमालय की सलाह
 
(चौपाई)
अब जौ तुम्हहि सुता पर नेहू । तौ अस जाइ सिखावन देहू ॥
करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू । आन उपायँ न मिटहि कलेसू ॥१॥
 
नारद बचन सगर्भ सहेतू । सुंदर सब गुन निधि बृषकेतू ॥
अस बिचारि तुम्ह तजहु असंका । सबहि भाँति संकरु अकलंका ॥२॥
 
सुनि पति बचन हरषि मन माहीं । गई तुरत उठि गिरिजा पाहीं ॥
उमहि बिलोकि नयन भरे बारी । सहित सनेह गोद बैठारी ॥३॥
 
बारहिं बार लेति उर लाई । गदगद कंठ न कछु कहि जाई ॥
जगत मातु सर्बग्य भवानी । मातु सुखद बोलीं मृदु बानी ॥४॥
 
(दोहा)
सुनहि मातु मैं दीख अस सपन सुनावउँ तोहि ।
सुंदर गौर सुबिप्रबर अस उपदेसेउ मोहि ॥ ७२ ॥

 

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