Sunday, 3 March, 2024

Ram meet Kaikeyi

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श्रीराम कैकेयी को मिलते है
 
आरत लोग राम सबु जाना । करुनाकर सुजान भगवाना ॥
जो जेहि भायँ रहा अभिलाषी । तेहि तेहि कै तसि तसि रुख राखी ॥१॥
 
सानुज मिलि पल महु सब काहू । कीन्ह दूरि दुखु दारुन दाहू ॥
यह बड़ि बातँ राम कै नाहीं । जिमि घट कोटि एक रबि छाहीं ॥२॥
 
मिलि केवटिहि उमगि अनुरागा । पुरजन सकल सराहहिं भागा ॥
देखीं राम दुखित महतारीं । जनु सुबेलि अवलीं हिम मारीं ॥३॥
 
प्रथम राम भेंटी कैकेई । सरल सुभायँ भगति मति भेई ॥
पग परि कीन्ह प्रबोधु बहोरी । काल करम बिधि सिर धरि खोरी ॥४॥
 
(दोहा)  
भेटीं रघुबर मातु सब करि प्रबोधु परितोषु ।
अंब ईस आधीन जगु काहु न देइअ दोषु ॥ २४४ ॥

 

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