Tuesday, 18 June, 2024

Ram reach Kaikeyi’s place

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Ram reach Kaikeyi’s place

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खबर मिलते राम कैकेयी के भवन पर पहूँचे  
 
सूखहिं अधर जरइ सबु अंगू । मनहुँ दीन मनिहीन भुअंगू ॥
सरुष समीप दीखि कैकेई । मानहुँ मीचु घरी गनि लेई   ॥
 
करुनामय मृदु राम सुभाऊ । प्रथम दीख दुखु सुना न काऊ ॥
तदपि धीर धरि समउ बिचारी । पूँछी मधुर बचन महतारी ॥२॥
 
मोहि कहु मातु तात दुख कारन । करिअ जतन जेहिं होइ निवारन ॥
सुनहु राम सबु कारन एहू । राजहि तुम पर बहुत सनेहू ॥३॥
 
देन कहेन्हि मोहि दुइ बरदाना । मागेउँ जो कछु मोहि सोहाना ।
सो सुनि भयउ भूप उर सोचू । छाड़ि न सकहिं तुम्हार सँकोचू ॥४॥
 
(दोहा)  
सुत सनेह इत बचनु उत संकट परेउ नरेसु ।
सकहु न आयसु धरहु सिर मेटहु कठिन कलेसु ॥ ४० ॥

 

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