Tuesday, 5 March, 2024

Well-wishers advise Kaikeyi to change her mind

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Well-wishers advise Kaikeyi to change her mind

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कई लोगों द्वारा कैकेयी को जिद छोडने की सलाह   
 
अस बिचारि उर छाड़हु कोहू । सोक कलंक कोठि जनि होहू ॥
भरतहि अवसि देहु जुबराजू । कानन काह राम कर काजू ॥१॥
 
नाहिन रामु राज के भूखे । धरम धुरीन बिषय रस रूखे ॥
गुर गृह बसहुँ रामु तजि गेहू । नृप सन अस बरु दूसर लेहू ॥२॥  
 
जौं नहिं लगिहहु कहें हमारे । नहिं लागिहि कछु हाथ तुम्हारे ॥
जौं परिहास कीन्हि कछु होई । तौ कहि प्रगट जनावहु सोई ॥३॥
 
राम सरिस सुत कानन जोगू । काह कहिहि सुनि तुम्ह कहुँ लोगू ॥
उठहु बेगि सोइ करहु उपाई । जेहि बिधि सोकु कलंकु नसाई ॥४॥
 
(छंद)
जेहि भाँति सोकु कलंकु जाइ उपाय करि कुल पालही ।
हठि फेरु रामहि जात बन जनि बात दूसरि चालही ॥
जिमि भानु बिनु दिनु प्रान बिनु तनु चंद बिनु जिमि जामिनी ।
तिमि अवध तुलसीदास प्रभु बिनु समुझि धौं जियँ भामिनी ॥
 
(सोरठा)
सखिन्ह सिखावनु दीन्ह सुनत मधुर परिनाम हित ।
तेइँ कछु कान न कीन्ह कुटिल प्रबोधी कूबरी ॥ ५० ॥

 

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