Friday, 14 June, 2024

Who is worth lamentation ?

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Who is worth lamentation ?

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क्या शोक करने लायक ?
 
अस बिचारि केहि देइअ दोसू । ब्यरथ काहि पर कीजिअ रोसू ॥
तात बिचारु केहि करहु मन माहीं । सोच जोगु दसरथु नृपु नाहीं ॥१॥
 
सोचिअ बिप्र जो बेद बिहीना । तजि निज धरमु बिषय लयलीना ॥
सोचिअ नृपति जो नीति न जाना । जेहि न प्रजा प्रिय प्रान समाना ॥२॥
 
सोचिअ बयसु कृपन धनवानू । जो न अतिथि सिव भगति सुजानू ॥
सोचिअ सूद्रु बिप्र अवमानी । मुखर मानप्रिय ग्यान गुमानी ॥३॥
 
सोचिअ पुनि पति बंचक नारी । कुटिल कलहप्रिय इच्छाचारी ॥
सोचिअ बटु निज ब्रतु परिहरई । जो नहिं गुर आयसु अनुसरई ॥४॥
 
(दोहा) 
सोचिअ गृही जो मोह बस करइ करम पथ त्याग ।
सोचिअ जति प्रंपच रत बिगत बिबेक बिराग ॥ १७२ ॥

 

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