Monday, 17 June, 2024

Bal Kand Doha 152

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Bal Kand  							Doha 152

Bal Kand Doha 152

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श्रीहरि अयोध्या में उनके पुत्र होकर प्रकट होने का वरदान देते है
 
(चौपाई)
इच्छामय नरबेष सँवारें । होइहउँ प्रगट निकेत तुम्हारे ॥
अंसन्ह सहित देह धरि ताता । करिहउँ चरित भगत सुखदाता ॥१॥
 
जे सुनि सादर नर बड़भागी । भव तरिहहिं ममता मद त्यागी ॥
आदिसक्ति जेहिं जग उपजाया । सोउ अवतरिहि मोरि यह माया ॥२॥
 
पुरउब मैं अभिलाष तुम्हारा । सत्य सत्य पन सत्य हमारा ॥
पुनि पुनि अस कहि कृपानिधाना । अंतरधान भए भगवाना ॥३॥
 
दंपति उर धरि भगत कृपाला । तेहिं आश्रम निवसे कछु काला ॥
समय पाइ तनु तजि अनयासा । जाइ कीन्ह अमरावति बासा ॥४॥
 
(दोहा)
यह इतिहास पुनीत अति उमहि कही बृषकेतु ।
भरद्वाज सुनु अपर पुनि राम जनम कर हेतु ॥ १५२ ॥

 

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