Thursday, 30 May, 2024

Bal Kand Doha 345

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Bal Kand  							Doha 345

Bal Kand Doha 345

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नवदंपतिओं का स्वागत
 
(चौपाई)
भूप भवन तेहि अवसर सोहा । रचना देखि मदन मनु मोहा ॥
मंगल सगुन मनोहरताई । रिधि सिधि सुख संपदा सुहाई ॥१॥
 
जनु उछाह सब सहज सुहाए । तनु धरि धरि दसरथ दसरथ गृहँ छाए ॥
देखन हेतु राम बैदेही । कहहु लालसा होहि न केही ॥२॥
 
जुथ जूथ मिलि चलीं सुआसिनि । निज छबि निदरहिं मदन बिलासनि ॥
सकल सुमंगल सजें आरती । गावहिं जनु बहु बेष भारती ॥३॥
 
भूपति भवन कोलाहलु होई । जाइ न बरनि समउ सुखु सोई ॥
कौसल्यादि राम महतारीं । प्रेम बिबस तन दसा बिसारीं ॥४॥
 
(दोहा)
दिए दान बिप्रन्ह बिपुल पूजि गनेस पुरारी ।
प्रमुदित परम दरिद्र जनु पाइ पदारथ चारि ॥ ३४५ ॥

 

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