Monday, 24 June, 2024

Bal Kand Doha 50

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Bal Kand  							Doha 50

Bal Kand Doha 50

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श्रीराम के दर्शन से भगवान शंकर भावविभोर
 
(चौपाई)
संभु समय तेहि रामहि देखा । उपजा हियँ अति हरपु बिसेषा ॥
भरि लोचन छबिसिंधु निहारी । कुसमय जानिन कीन्हि चिन्हारी ॥१॥
 
जय सच्चिदानंद जग पावन । अस कहि चलेउ मनोज नसावन ॥
चले जात सिव सती समेता । पुनि पुनि पुलकत कृपानिकेता ॥२॥
 
सतीं सो दसा संभु कै देखी । उर उपजा संदेहु बिसेषी ॥
संकरु जगतबंद्य जगदीसा । सुर नर मुनि सब नावत सीसा ॥३॥
 
तिन्ह नृपसुतहि नह परनामा । कहि सच्चिदानंद परधमा ॥
भए मगन छबि तासु बिलोकी । अजहुँ प्रीति उर रहति न रोकी ॥४॥
 
(दोहा)
ब्रह्म जो व्यापक बिरज अज अकल अनीह अभेद ।
सो कि देह धरि होइ नर जाहि न जानत वेद ॥ ५० ॥

 

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