Friday, 21 June, 2024

Ram display his divine form to Kaushalya

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श्रीराम माता कौशल्या को अपने विराट स्वरूप की झाँकी कराते है
 
(चौपाई)
एक बार जननीं अन्हवाए । करि सिंगार पलनाँ पौढ़ाए ॥
निज कुल इष्टदेव भगवाना । पूजा हेतु कीन्ह अस्नाना ॥१॥

करि पूजा नैबेद्य चढ़ावा । आपु गई जहँ पाक बनावा ॥
बहुरि मातु तहवाँ चलि आई । भोजन करत देख सुत जाई ॥२॥

गै जननी सिसु पहिं भयभीता । देखा बाल तहाँ पुनि सूता ॥
बहुरि आइ देखा सुत सोई । हृदयँ कंप मन धीर न होई ॥३॥

इहाँ उहाँ दुइ बालक देखा । मतिभ्रम मोर कि आन बिसेषा ॥
देखि राम जननी अकुलानी । प्रभु हँसि दीन्ह मधुर मुसुकानी ॥४॥

(दोहा)
देखरावा मातहि निज अदभुत रुप अखंड ।
रोम रोम प्रति लागे कोटि कोटि ब्रह्मंड ॥ २०१ ॥

 

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